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Friday, 23 December 2011

इंसानियत का एक नाम "अब्दुल सत्तार एधि "

अब्दुल सत्तार एधि पाकिस्तान का वो जाना माना नाम जिस पर कोई भी पाकिस्तानी आँख बंद कर के यकीन करता है...ये भले कोई पाकिस्तान का जनक या नेता नहीं बल्कि ऎसी शक्सियत जो अगर किसी रोड पर भी खड़े हो जाए तो ७-८ करोड़ चंदा आराम से इकट्टा कर ले ..चौकिये मत ...क्युकी ये मैं नहीं कह रही ये खुद एधि साहब का कहना है...
EDHI FOUNDATION पाकिस्तान की एक ऎसी नॉन प्रोफिताब्ले संस्था है जो १९५१ से कार्यरत है ..ये समाज सेवी संस्था है जो आपातकाल सेवाएँ ,एम्बुलेंस ,मानसिक रूप से कमज़ोर ,महिलाओ ,बच्चो ,वृधो , का सहारा है...इस संस्था की कोई सहायता सीमा नहीं है...अब्दुल सत्तार एधि का मानना है ..के उनका जीवन इंसानियत को समर्पित है...अब्दुल ने पाकिस्तान में एक बार राजनीती का हिस्सा बनाने की कोशिश की ..इलेक्शन में खड़े होने पर ये चीज़ एक बहूत ही अतुल्निय है की अब्दुल को किसी विरोधी का सामना नहीं करना पड़ा ..क्युकी उनके खिलाफ कोई खड़ा ही नहीं हुआ...मगर  अब्दुल ने जल्द ही राजनीती छोड़ दी ..उनका मानना था की वो पाकिस्तान की सेवा करना चाहते है जो इस जगह से संभव नहीं है ...
जहा पाकिस्तान को धार्मिक रूप से  बहूत कट्टर देश मन जाता है वही अब्दुल सत्तार साहब का मानना है की  इंसानियत दुनिया के तमाम धर्मो से ऊपर है ..उन्होंने अपने संगठन की शुरुवात ही कुछ उस वक़्त की जब पाकिस्तान जैसे देश को सच में किसी ऐसे व्यक्ति की ज़रुरत थी जो सचे मन से सेवा करना चाहता हो...edhi foundation सिर्फ एक पाकिस्तानी समाज सेवी संस्था नहीं है ..बल्कि अमेरिका ,लन्दन ,कनाडा ,बंगलादेश ,जापान ,ऑस्ट्रेलिया, नेपाल और अफ्घनिस्तान में भी कार्यरत है..

अब्दुल सत्तार एधि का मानना है की इंसान को खुदा ने सबसे सर्वाश्रेट प्राणी बनाया है...उसका भी मकसद यही है के इन्सान अपना जीवन दुसरो को जीवन देने में गुज़ार दे..सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं जानवरों की भी कई संस्था edhi foundation के अन्दर कार्य कर रही है ...ये संस्था आम आदमी  के अनुदान द्वारा चलाई जा रही है...अब्दुल सत्तार सा सारा परिवार उन्ही की तरह इसी संस्था को अपनी सेवा प्रदान कर रहे है...अब्दुल सत्तार एधि ने ना केवल दुसरो की सेवा की अपितु अपने जीवन के लक्ष्य को भी प्राप्त  किया है ...ऎसी संस्था और ऐसे व्यक्तित्व हम सभी के लिए एक आदर्श रूप है...

Wednesday, 21 December 2011

कैसा होगा लोक पाल ???

लोक पाल को ले कर तलवारे खीच चुकी है . जितना बवाल और विरोध लोक पाल को ले कर संसद के बहार हो रहा है उतना ही विरोध इसका संसद के भीतर भी चल रहा है.लालू और मुलायम जैसे नेता तो इसके विरोध मे है ही मगर बीजेपी भी अब इसके विरुद्ध आ चुकी है.मगर इन सब के दर लोक पाल को ले कर अलग अलग है .
जहां बीजेपी का मानना है की इस लोक पाल में कोई दम नहीं है तो वही मुलायम को ये डर सता रहा है की यदी सारी  ताक़त एक हाथो में दे दी जाएगी  तो नेताओ की कोई इज्ज़त नहीं रह जाएगी .
बुधवार को स.पा के नेता मुलायम सिंह ने लोक पाल का पुर जोर विरोध किया..उनका कहना था अगर ऐसा लोक पाल बनाया गया जिसमे सारी शक्ति एक व्यक्ति में समाहित होगी तो वो दिन दूर नहीं जब दरोगा नेताओ को उठा कर जेल में ठूस देंगे. कि लोकपाल आ जाएगा तो एसपी, डीएम, दरोगा जब चाहेंगे, हमें जेल भेज देंगे। ....मुलायम का मानना है ऐसा लोक पाल बना तो पुलिस के पास सारी ताकत होगी और नेताओ की कोई इज्ज़त नहीं करेगा..लालू भी मुलायम के समर्थन में उतरे और उन्होंने कहा की इस  साजिश को सांसदों को समझना चाहिए ..
मगर रोचक बात यह है की ये वही मुलायम है जो शुरुवात में अन्ना का खुले आम समर्थन करते नज़र आ रहे थे ..और आज वही अन्ना से अपनी कन्नी काट रहे है ..इससे  पहले अन्ना की रैली में राम गोपाल यादव जो राज्य सभा के एम.पी भी है ..वो भी खुले शब्दों में अन्ना के समर्थन करते नज़र आये 
अब इकदम से अन्ना हजारे से मुह फेर लेना...कुछ समझ नहीं आया ..
मगर, बीजेपी का रुख इन दलों से कुछ अलग है। बीजेपी लोकपाल को और मजबूत बनाना चाहती है। पार्टी महासचिव और प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि पार्टी लोकपाल को और मजबूत बनाना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में बहस के दौरान पार्टी का रुख यह रहेगा कि सीबीआई को लोकपाल के दायरे में होना चाहिए। 
राज्यसभा में पार्टी के नेता अरुण जेटली ने कहा कि बीजेपी संसद के सत्र की अवधि बढ़ाए जाने पर तो सरकार से सहमत है लेकिन प्रस्तावित लोकपाल बिल के प्रावधानों से नहीं। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी मौजूदा स्वरूप में बिल का समर्थन नहीं कर सकती। 
साफ हो गया है कि 27, 28 और 29 दिसंबर को लोकपाल के मसले पर अन्ना के अनशन और बीजेपी के विरोध के चलते सरकार को संसद के बाहर ही नहीं अंदर भी तगड़ा विरोध झेलना होगा।..ऐसी स्थिथि में इतने सारे विरोधो के चलते कैसा लोकपाल आएगा ये देखना है ..



Monday, 19 December 2011

राखी जैसा कोई नहीं ..!!

काफी दिन से शांत राखी सावंत  ने अपनी चुप्पी तोड़ी और अब फिर मीडिया की चहेती...मीडिया का सहारा ले कर कटरीना पे आरोप लगाती नज़र आ रही है ...
राखी का कहना है की कटरीना शुरू से अभी तक उनकी नक़ल करती आ रही है..उनका ऐसा मानना है राखी जो कुछ करती है वो पहली बार किया गया होता है अब चाहे वो अपने बॉय फ्रेंड  को मीडिया के सामने थापद मरना हो या बिग्ग बॉस के घर में  मरने की धमकी देना हो ..यहाँ तक तो हम हम मान सकते है की वो जो भी करती है सच मुच अद्भुत ही होता है ...और अतुल्निय भी ..मगर अब कटरीना पे उनका ये आरोप है की कटरीना ने अग्निपथ में चिकनी चमेली पर जो डांस किया है वो तारीफ के काबिल तो है मगर कटरीना ने कुछ नया नहीं किया ..बल्कि वो अब राखी के नक़्शे कदम पर चलने लगे है..राखी कहती है की अभी से नहीं कटरीना ने जो डांस शीला की जवानी में किया था उसमे भी राखी ही उनकी प्रेरणा रही ...क्युकी राखी.."दखता है तू क्या" में  वो पहले ही कर चुकी है ...
कही इस स्तातेमेंट के पीछे राखी का ये दर तो नहीं के अब उनकी जगह वीणा CONTROVERCIAL  दुनिया की रानी बन गए है ..वो जो भी हो...मगर राखी को ये इलज़ाम किस पर लगा रही है.....शायद ये बात राखी को याद नहीं था ...उनको जल्द ही इस चीज़ का एहसास हुआ और उन्हें लगा कही   कटरीना पर वार करना उन पर ही न भारी पढ़ जाए ..इसिलय राखी ने फ़ौरन कह दिया अगर कोई उनकी नक़ल करता तो उन्हें ये चीज़ पसंद है...अगर उनकी कोई नक़ल करता है तो इसिलए क्युकी वो सब की चहेती है ...कही राखी खुद को ड्रामा कुईं की जगह डांसिंग कुईं तो नहीं समझती ??????????
ये तो राखी ही बेहतर जानती होगी

Sunday, 11 December 2011

is india really against the corruption?

आज हम जहा भी देख रहे है हमे वही लोग नज़र आ रहे है जो भरष्टाचार के खिलाफ है ...कोई भी ऐसा मुझे अब याद नहीं जो खुद को भारस्ताचार का सहभागी बताता दिखे...जिसका उदहारण हम अन्ना हजारे के मोर्चो  में देख सकते है ..जहा सभी india against corruption के पोस्टर लिए देखंगे ...आज पूरा भारत चाहता है की भारत सेcorruption   का अंत हो जाए...मगर हम ये ही क्यों भूल जाते है की उस भरष्टाचार...उस corruption की जड़ कही न कही हम में ही है ...


आज एक आम विद्यार्थी से ले कर एक उच्च वर्गीय व्यक्ति यही चाहता है की इसका अंत हो...मगर हम ये क्यों भूले जा रहे है की ये देश हमसे ही बनता है..इस देश के नागरिक हम ही है...तो यहाँ corrupt भी हम ही है..आज अगर किसी काम के लिए लम्बी लाइन होती है तो हम उस लम्बी लाइन का हिस्सा बनने से बेहतर कुछ पैसा चपरासी को खिला कर खिड़की छोड़ के दरवाज़े से  काम करवाना सही समझते है ....अब चाहे वो लाइन कॉलेज में फॉर्म जमा करने की हो या और किसी दफ्तर की... ऑटो  में ४ की जगह ६ बेह्ताने वाले अपने ऑटो के आगे अन्ना हजारे का समर्थन करते नज़र आ रहे है...स्कूल और कॉलेज में अपने पढ़ाने के टाइम पे चाय की चुस्की लेने वाले बच्चो को अन्ना का समर्थन  करना सिखा रहे है...हॉस्पिटल में कभी टाइम पे न आने वाले डॉक्टर खुल कर अन्ना की भाषा बोल रहे है ...और अब बात करते है उस उच्च वर्ग की जो अपनी पैसो की धोस दिखा कर हर जगह खुद को सर्वोच साबित कर जाते है ......तो क्या पैसा खाना ही corruption है????? खिलाना नहीं? हम किसका साथ दे रहे है ...अपने दुस्मानो का क्युकी हम खुद ही इसका हिस्सा है..हमे सर्कार से किसी बिल के लिए लड़ना छोड़ कर खुद से लड़ना सिख लेना चाहिए...
माना देश बहुत ब्रष्ट हो चूका है ..भारस्ताचार की दीमक इससे खाए जा रही है ...मगर ये दीमक अमेरिका या चीन की भेजी हुए नहीं है ...यहाँ आ के corruption जर्मनी या इटली नहीं करा ...अगर लड़ना है तो अपने अन्दर के corruption के कीड़े को मारना पड़ेगा तब कही जा कर ये देश सुधर पाएगा
ऐसे में सवाल हमे खुद से पूछना चाहिए...are we really against the corruption??

Friday, 11 November 2011

मेरा कुछ सामान तुम्हारे पास पड़ा है

सभ्यता की हद्दो को लांघने वाले फ्रांसिस पेंटर नेव्तों सुजा ने तीन साल पहले एक पेंटिंग बनायीं थी जो काफी  चर्चा में रही ..इसमें एक दंपत्ति की तस्वीर दो कैनवास पर बनाये थी ..इसमें एक तरफ एक महिला अपने बचे को गोद में लिए बहती  है..दूसरी और एक आदमी काट पन्त पहने बहता है..जब सुजा साईं पुचा गया की उन्होंने ऐसा क्यों किया...तो उन्हने जवाब दिया क जब दंपत्ति अलग होगी तो पेंटिंग को ले कर लड़े न करनी पड़े..उस समय ये जवाब बहूत से लोगो को अजीब लगा होगा..मगर अगर इसे आज के परिद्शेय में दखे तो सुजा नै भविष्य  की  एक समस्या की तरफ इंगित करते हुए ये पेंटिंग बनाए थी...
आज जब लोग तलक ले कर अलग होते है तो सिर्फ कस्टडी  या कैश  के लिए ही नहीं बहुत सी अजीबो गरीब चीजों पे लड़ते नज़र आते है ...हाल ही में सिंगर  अदनान सामी और सबा के तलक  समय सबा का कहना था की वो साड़ी  शर्तो को मानने को तैयार है बशर्ते अदनान को रौक (कुत्ता) वापस करना पड़ेगा..
वकीलों का ऐसा कहना है की तलक ले रही दम्पतिया के मध्य बच्चो की क्स्तोद्य  का मसला तो आराम से सुल्ज जाता है...किन्तु पेंटिंग्स , कुत्ते आदि तीखी चिट्टा कशी का कारन बन जाते है...
मशहूर वकील मुदुला कदम कहती है की तलक के दौरान दम्पति उसी  सामान पे जम क्र लड़ते है जिससे वो भावनात्मक रूप से जुद्दे होते है..
ऐसे में लडती झगडती अलग होती ये दम्पतियन संस्कृति का गला  तो घोट ही रही है और समाज के सामने बहूत ही गंभीर समस्या पैदा कर रही है ..
तलक शुदा दम्पतियाँ अपने बच्चो का भविष्य तो अन्धकार में डालते ही है साथ ही इन सामान कके लिए लड़ लड़ कर उनके सामने ये छवि  पेश करते है की आज इन्सान से ज्यादा  किसी भी इन्सान के लिए सामान ज्यादा  मायने रखता है..

किसी कुत्ते या  पेंटिंग्स  क साथ इतने भावनात्मक रूप से जुड़ कर अपनों को ही बेगाना कर देना ..कहा की इंसानियत है..

Sunday, 6 November 2011

हमारी "कमज़ोर" न्यायिक व्यवस्था

डी म के की नेता कनिमोझी अभी भी जेल की सलाखों के पीछे है...उन्होंने नयायपालिका से ये गुहार लगे थी की उनको जमानत मिलनी चाहिए ...क्युकी अभी तक उनका गुनाह साबित नहीं हुआ है.. नयायपालिका नै यह कह कर जमानत की अर्जी नामंजूर कर दी की इनकी दलीलों में कोई दम नहीं है ...
इसी नयायपालिका को कल उस वक़्त शर्मिंदा होना पड़ा जब एक मरा हुआ व्यक्ति वापस आ गया ...२ अगस्त २००० को रामेश्वर , मोहन और दाल चाँद को भगवान दास के मर्डर के केस मई तीनो को उम्र कैद सुनाये गयी थी ...यह तीनो दस साल से जिस भगवन दास के मर्डर की सज़ा काट रहे थे ..वही अब वापस आ गया ..
भगवान् दास का कहना था की वो तो हिमांचल प्रदेश में काम कर रहा था ...अब सवाल ये है की क्या भारतीय न्यायिक व्यवस्ता क्या उन तीनो को वेह १० साल वापस कर सकती है...उनके परिवार नै जिस हालातो में यह १० साल काटे क्या उसकी भरपाई कर सकती है? 
आज भी किसी केस को सुल्जाने में इतना समय क्यों लगा देती है...बलात्कार के किसी केस में सुनवाई जब ही क्यों हो पाती है...जब या तो वो महिला दादी नानी बन जाती है या फिर अपराधी ही दुनिया से सिधार जाता है...
क्यों अभी तक बाबरी मस्जिद पे कोई फैसला नहीं हो पाया ..?
आरुशी जैसे मासूम को अभी तक न्याय क्यों नहीं मिल पाया...?
सवाल कई है जिनके सवाल अभी भी नदारद है...!!
कहने को तो हम दुनिया के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहे है...तो क्यों आज हमारी न्यायिक व्यवस्था इतनी कमज़ोर है ...

Friday, 4 November 2011

भुझो तो जाने ..!!

एक नयी समस्या उत्पन हो रही है जिसपे किसी का अभी तक विशेष ध्यान नहीं गया है...जो पेट्रोल की बदती कीमतों जितनी महत्वपूर्ण तो नहीं है..किन्तु लालू की अंग्रेजी जैसे रोचक ज़रूर है..बाबा राम देव आखिर है क्या?
कभी तो वो योग गुरु बन जाते है कभी दुसरो को देख कर अनशन की प्रवाह में बहते हुए हॉस्पिटल पहुच जाते है...कभी किसी तलेंट शो में  पहुच कर निर्णय देते नज़र आते है तो अब किसी कब्बडी प्रतियोगिता में खिलाडियों का उत्साह  बढ़ने पहुचते है  तो उनका खुद का उत्साह  इतना बाद जाता है की वो खुद ही मैदान में कूद पड़ते है ...वह रे बाबा ..तेरे रूप अनेक...अब ऐसे में बाबा के अनुयायी अपने बहुप्रतिभाशाली बाबा के किस रूप को आदर्श माने???? ये तो बाबा ही बता सकते है ..!!